Sunday, 19 July 2015
सत्यप्रकाश का 14 समुलास और दयानंद की भाषा और इसकी समीक्षा पार्ट -1
भारत में सभी धर्मो का एक - सच ..?
वैदिक धर्म की की और आना कैसा ..?
महेन्द्रपाल आर्य का अपने आपको मोलवी और कुरान पर नुक्ताचीनी करना गलत नही ..?
क्या अल्लाह प्राणी जीवो के लिए दया रखता हे .?
Big GanG theory(पर गलत नही बेवकुफ बनाते है आर्य )
आप जानते ही होंगे आर्य समाजि बिगबैंग को गलत कहकर ये कहते है की कायनात ब्रहमाण्ड प्रक्रति कणो से बना है प्रक्रति कण क्या है ! आर्य समाज के दयानन्द सरस्वती की किताब सत्यार्थ प्रकाश के आठवे समुलास मे कहा गया रज: तम: यानी मध्य और जडता निच से जो कण बना वह प्रक्रति है! अब कुरान मे सुरह अम्बिया आयत तीस ३० मे कहा गया क्या इंकारियो को इतना भी नही सुझा कि जमीन और आसमान बंध यानी एक जान थे फिर हमने इंको जुदा कर दिया और पानी से हमने हर चीज को जिन्दगी दी क्या फिर ये लोग ईमान कबुल नही करते यहाँ चरम ताप गोले की तरफ ईशारा है..अब इसलाम ये नही कहता की कायनात मे प्रदार्थ प्रमाणु से नही बने बलकी यहाँ कायनात के विस्तार से पहले की दशा का जिक्र है जबकी हिग्स बॉसान भी प्रोटॉन से चरम ताप पर बनता है मतलब कायनात की शुरुआत कणो से नही बिग बैंग से हुई जिनेवा (स्विट्जरलैंड)। वैज्ञानिकों ने बुधवार को परमाणु के भीतर नया कण खोजने का दावा किया है। यह उस ‘हिग्स बोसॉन’ यानी गॉड पार्टिकल से मिलता-जुलता है जिससे माना जाता है कि ब्रह्मांड अस्तित्व में आया। सर्न के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के इस रहस्य को सुलझाने के लिए 2008 से प्रयोग कर रहे थे।
बुधवार को उन्होंने इसके नतीजे का ऐलान कर दिया। वैज्ञानिकों की टीम के प्रवक्ता जोए इनकाडेला ने कहा कि ‘हम हिग्स बोसॉन के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि नया कण हिग्स बोसॉन ही है, यह कहने में वक्त लगेगा।’ लेकिन प्रयोग के दौरान जो कण मिले, वे उस जैसे ही हैं।
प्रयोग में हमारा योगदान
1. इस खोज में भारत के 100 से अधिक वैज्ञानिक कई स्तरों पर शामिल रहे।
2. भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा महाप्रयोग में शुरू से ही शामिल रहीं।
3. एफिल टावर से ज्यादा भारी 8,000 टन के चुंबक के हिस्से भारत में बने।
बोस ने दिया बोसॉन
भारतीय भौतिकविद सत्येंद्रनाथ बोस ने 1924 में बताया कि परमाणु में मौजूद कण प्रोटॉन एक जैसे नहीं होते। उनसे निकलने वाली ऊर्जा अलग-अलग होती है। इसी आधार पर बोस-आइंस्टीन फामरूला सामने आया। सब-एटॉमिक पार्टिकल को बोसॉन कहा गया।
क्या है गॉड पार्टिकल यानी हिग्स बोसॉन?
1. ब्रह्मांड में सभी कण बिखरे हुए थे। प्रकाश की गति से यहां-वहां घूम रहे थे। जैसे पार्टी में मेहमान बिखरे रहते हैं। लेकिन सेलिब्रिटी के आते ही वे उसे घेर लेते हैं।
2. 14 अरब साल पहले बिग बैंग के समय सामने आए हिग्स बोसॉन ने सेलिब्रिटी की तरह कणों को जोड़ा। उन्हें द्रव्यमान दिया। जिससे परमाणु, अणु आदि बने।
इसलिए जरूरी था प्रयोग...
1. ब्रह्मांड की हर चीज में गुरुत्व बल और द्रव्यमान (मास) से भार होता है। द्रव्यमान पैदा करने वाला कण हिग्स बोसॉन है। अब तक स्टैंडर्ड फिजिक्स के 11 कण ढूंढ़े जा चुके हैं। लेकिन हिग्स बोसॉन तक नहीं पहुंच पाए थे।
2. यदि हिग्स बोसॉन तक नहीं पहुंच पाते तो स्टैंडर्ड फिजिक्स के सिद्धांत झूठे साबित होते। अब तक की धारणाएं झुठला दी जाती और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के अलावा पदार्थो के बनने के नए सिद्धांत भी तलाशने पड़ते।
तो कैसे तलाशा गया इसे?
1. जिनेवा में सर्न की जमीन से 175 मीटर नीचे बनी प्रयोगशाला में 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में प्रोटॉन बीम्स की टक्कर कराई गई।
2. एक सेकंड में प्रोटॉन बीम्स ने सुरंग के 11 हजार चक्कर लगाए। इससे सूरज के केंद्र के तापमान से भी लाखों गुना ज्यादा तापमान पैदा हुआ।
3. तापमान बढ़ने से प्रोटॉन टूटा। ‘हिग्स बोसॉन’ जैसे कण बने। इसका द्रव्यमान तुलनात्मक रूप से प्रोटॉन से 120 से 130 गुना ज्यादा पाया गया। दोनों टीमों (एटलस और सीएमएस) ने इस कण की पुष्टि की है।
अब ये सवाल सुलझेंगे
1. 14 अरब साल पहले ब्रह्मांड कैसे बना?
2. धरती कैसे अस्तित्व में आई?
3. इंसान और छोटी से छोटी चीजें कैसे जन्मी?
4. आकाशगंगा, तारे और ग्रह कैसे बने?
5. वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की पांच फीसदी जानकारी है। शेष हिस्सा डार्क मैटर कहा जाता है। इसके रहस्य से अब पर्दा उठेगा।
लेकिन इनके जवाब बाकी हैं?
1. वैज्ञानिक तय नहीं कर पा रहे हैं कि नए कण को हिग्स बोसॉन ही कहा जाए या नहीं।
2. हो सकता है कि यह कण हिग्स का ही एक रूप हो या फिर एक नया ही कण हो।
3. अगर इसे नया कण माना गया तो हर चीज के बुनियादी ढांचे को लेकर बनाए गए वैज्ञानिक सिद्धांत गड़बड़ा सकते हैं।
हमें क्या फायदा?
बता रहे हैं सर्न प्रयोगशाला स्थित सीएमएस के वैज्ञानिक प्रो. विवेक आनंद शर्मा
जो निष्कर्ष मिलेंगे, उससे चिकित्सा और संचार तकनीकी में और विकास ला सकते हैं, जिसका अगले कुछ दशकों से आम आदमी फायदा उठा सकता है। यह एकदम वैसा ही है जैसे 100 साल पहले इलेक्ट्रॉन की खोज हुई। फिर बिजली और उसके बाद संचार क्षेत्र में अद्वितीय विकास हुआ। सेल फोन आए, कम्प्यूटर आए, जीपीएस की खोज हुई।
इसे ऐसे समझिए
1. चिकित्सा क्षेत्र में प्रयोग होने वाले स्कैनिंग इंस्ट्रूमेंट जो कि एटम स्मैशर पद्धति पर काम करते हैं उनका विकास होगा। मानव शरीर में मौजूद बीमारियों की विस्तृत और सूक्ष्मतर जानकारी मिल सकेगी।
2. सर्न की लैब में रोज जितना डाटा एकत्रित होता है उसे सही तरीके से रखने और दोबारा प्राप्त करने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू की खोज हुई थी। जो अब पूरी दुनिया में मुफ्त है। दो दशकों में ही यह पूरी दुनिया में संचार का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। नए प्रयोग से इंटरनेट के क्षेत्र में विकास और तेज होगा।
3. परमाणु ऊर्जा, कंप्यूटर, मेडिसिन, मैन्यूफेक्चरिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी अविष्कारों के लिए दिशा मिलेगी। इलेक्ट्रॉन की ही मदद से आधुनिक विज्ञान के कई अविष्कार हुए। जो टीवी से लेकर सीडी और कैंसर रोगियों के लिए रेडियोथेरेप
सवाल-अल्लाह ने शेतान को क्यों बनाया ..?
Saturday, 18 July 2015
आर्य समाज के संस्थापक दयानंद जी का जीवन
BiG BanG in Quran
क्या बिग बैंग थ्योरी गलत है?
बिग बैंग थ्योरी आज के ज़माने में यूनिवर्स
क्रियेशन की सबसे मज़बूत थ्योरी
है। इसके अनुसार दुनिया एक महाधमाके (बिग बैंग) से पैदा
हुई और उस वक्त से मौजूदा जमाने तक यह लगातार
फैल रही है। यह धमाका कितने वक्त
पहले हुआ इस बारे में वैज्ञानिकों में अलग अलग राय
है। कुछ के अनुसार ब्रह्माण्ड की कुल आयु
14 बिलियन वर्ष है तो कुछ के अनुसार 20 बिलियन वर्ष।
शुरूआती यूनिवर्स बहुत ही
सघन (Dense), और छोटे गोले के रूप में था। और अत्यन्त
गर्म था। फिर एक महाधमाके (बिग बैंग) के साथ टाइम और
स्पेस का जन्म हुआ। उस समय से आज तक यह
लगातार फैल रहा है।
बिग बैंग थ्योरी ‘रेड शिफ्ट’ और ‘कास्मिक वेव
बैकग्राउण्ड’ जैसे सुबूतों के द्वारा सत्यापित
होती है। रेड शिफ्ट बताती है कि
यूनिवर्स लगातार फैल रहा है, और जब इस फैलाव का
ग्राफ बैक साइड की तरफ बढ़ाया जाता है तो
एक बिन्दु की तरफ मिलता हुआ दिखाई देता
है। यही यूनिवर्स का
शुरूआती बिन्दु है। ‘कास्मिक वेव
बैकग्राउण्ड’, से पता चलता है कि यूनिवर्स का
शुरूआती टेम्प्रेचर आज के यूनिवर्स से बहुत
ज्य़ादा था। जो कि एक बिग बैंग का टेम्प्रेचर हो सकता है।
बिग बैंग थ्योरी कास्मोलॉजिकल थ्योरी
और आइंस्टीन की
रिलेटीविटी थ्योरी पर
भी खरी उतरती है।
ये तो बात हुई साइंस की। अब देखते हैं कि
इस्लाम इस बारे में क्या कहता है।
आईए पहले गौर करते हैं कुरआन हकीम
की कुछ आयतों पर
(6-101) वह (अल्लाह) सारे आसमान व
जमीनों का बनाने वाला है।-----
(51-47) आसमान को हमने अपने जोर से बनाया है।
और हम इसे विस्तार देकर फैलाते हैं।
(21-30) जो लोग काफिर हैं क्या वो इस पर गौर
नहीं करते कि आसमान व ज़मीन
दोनों आपस में मिले हुए थे और हमने उन्हें अलग किया।
हमने ही जानदार को पानी से पैदा
किया, इस पर भी ये लोग ईमान न लायेंगे।
(21-33) और वही वह (कादिरे मुतलक़)
है जिसने रात व दिन और आफताब व महताब को पैदा किया
कि सब के सब आसमान में तैरते हुए गर्दिश कर रहे
हें।
कुरआन की इन आयतों की
रौशनी में जो बातें साफ होती हैं,
वह ये कि यूनिवर्स में हर चीज पहले एक
दूसरे से मिली हुई थी। फिर सब
कुछ एक दूसरे से अलग हुआ और तब से यूनिवर्स
लगातार फैल रहा है। यूनिवर्स में कई आसमान हैं और
कई ज़मीनें। इन आसमानों में जो कुछ
भी है सब गर्दिश में है। कुछ भी
रुका हुआ नहीं है।
अब आप समझ सकते हैं कि बिग बैंग जैसी
मौजूदा थ्योरीज कुरआनी
हकीकतों के कितने करीब हैं। बिग
बैंग और कुरआन दोनों ही बताते हैं
कि शुरुआत में यूनिवर्स एक बिन्दु जैसी जगह
में सिमटा हुआ था। फिर यूनिवर्स के हिस्से अलग अलग
हुए और एक दूसरे से दूर हटने लगे।
अब एक सवाल उठता है कि यूनिवर्स के स्टार और
गैलेक्सीज किस चीज के जरिये
खल्क हुए? इस बारे में साइंस कुछ खास
नहीं बता पा रही है।
हकीकत ये है कि साइंस सितारों के बनने
की गुत्थी अभी तक
सुलझा नहीं पायी है। न
ही ये बता पायी है कि कायनात
की खिलकत में बनने वाला पहला मैटर कौन सा
था? लेकिन अगर हम कुरआन की ऊपर
लिखी आयतों पर गौर करें तो समझ में आता है
कि कायनात में बनने वाला पहला मैटर पानी था।
क्योंकि आयत कह रही है,‘हमने
ही जानदार को पानी से पैदा किया’।
लेकिन आयत तो सिर्फ जिन्दगी के बारे में कह
रही है? तो इसका जवाब ये है कि भले
ही साइंस कुछ ही
चीजों को जिन्दा माने लेकिन खालिके कायनात
की नजर में हर चीज जिन्दा है
और उसकी इबादत कर रही है।
सबसे पहले खल्क होने वाला मैटर पानी था,
इसके लिये एक और सुबूत हज़रत अली (अ-
स-) का खुत्बा है जो उनकी किताब नहजुल
बलागा में दर्ज है, इस खुत्बे में कहा गया है, ‘‘फिर ये कि
उस ने (अल्लाह ने) कुशादा फिज़ा, वसीअ
एतराफ व इकनाफ और ख़ला की वुसाअतें
ख़ल्क कीं और उन में ऐसा पानी
बहाया जिसके दरियाये मवाज़ की लहरें
तूफानी और बहरे ज़खार की मौज़े
तह ब तह थीं।’’ यानि स्पेस टाइम
की खिलकत के बाद पहला बनने वाला मैटर
पानी था।
अब एक सवाल और पैदा होता है, कि कायनात
की खिलकत में वक्त कितना लगा? इस बारे में
गौर करते हैं कुछ और आयतों पर,
(7-54) -----बेशक तुम्हारा परवरदिगार अल्लाह
ही है जिसने 6 दिनों में आसमान व
जमीन को पैदा किया। फिर अर्श को बनाने पर
आमादा हुआ। वही रात को दिन का लिबास
पहनाता है तो रात दिन को पीछे
पीछे तेजी से ढूंढती
फिरती है। और उसी ने आफताब
व महताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब
उसी के हुक्म के ताबेदार हैं।
(10-4) इसमें तो शक ही नहीं
कि तुम्हारा परवरदिगार वही अल्लाह है
जिसने सारे आसमान व जमीन को 6 दिन में पैदा
किया। फिर उसने अर्श को बलन्द किया------
पहली नजर में देखा जाये तो ये जुमले मौजूदा
साइंस की बुनियाद पर खरे नहीं
उतरते। कहाँ तो साइंस यूनिवर्स को बनने में अरबों खरबों
सालों की बात कर रही है और
कहां कुरआन सिर्फ छह दिनों की बात कर
रहा है। लेकिन एक बात जो गौर करने वाली
है वह यह कि हम अपना दिन गिनते हैं
पृथ्वी के अपने अक्ष पर एक पूरे चक्कर
से। जो कि चौबीस घंटे के बराबर होता है। ये
घंटे भी हमारे खुद के बनाये हुए हैं। अब
कायनात बनने की शुरुआत में
हमारी जमीन का
कहीं अता पता नहीं था। इसका
मतलब कायनात बनने में 6 दिनों की जो बात हो
रही है उसका मतलब कुछ और है। ये 6
दिन खिलकत की छह स्टेजें भी
हो सकती हैं और इनका कोई और मतलब
भी निकल सकता है। मिसाल के तौर पर इन
आयतों पर गौर करें
(32-5) आसमान से जमीन तक के हर
अम्र का वही मुदब्बिर व मुतजिम है। ये
बन्दोबस्त उस दिन जिस की मकदार तुम्हारे
शुमार से हजार बरस है उसकी बारगाह
में पेश होगी।
(70-4) जिसकी बारगाह में फ़रिश्ते व रूहें
हाजिर होती हैं एक ऐसे दिन में जिसका
अन्दाजा पचास हजार बरस है।
इस तरह यह साफ हो जाता है कि वक्त के गुजरने
की रफ्तार अलग अलग हालात में अलग अलग
है यही बात आज की साइंस
भी कह रही है। कि वक्त के
गुजरने की रफ्तार चीजों के चलने
की रफ्तार और यूनिवर्स में
उनकी पोजीशन से तय
होती है। इस तरह कायनात की
खिलकत में यकीनन एक लम्बा वक्फा गुजरा
है।
इस तरह से कुरआन और बिग बैंग थ्योरी
काफी हद तक एक दूसरे से मैच कर रहे
हैं। लेकिन इसमें कहीं कोई ऐसी
बात भी है जो खटक रही है।
मिसाल के तौर पर एक बड़े धमाके का होना। इसलिये क्योंकि
मौजूदा दौर में कोई खिलक़त इस तरह नहीं
हो रही है।
हम गौर करते हैं एक और क़दीम
इस्लामी दानिश्वर इमाम जाफर अल सादिक
(अ-) की बात पर। इमाम जाफर सादिक (अ-)
जो इमाम हुसैन (अ-) के पड़पोते थे, कहते हैं कि
यूनिवर्स के पैदाइश एक छोटे पार्टिकिल (जर्रे) से हुई
जिसके दो विपरीत ध्रुव (Opposite Poles)
थे। यह ज़र्रा विखण्डित (Fragmented), हुआ और
अपने जैसे और ज़र्रों की
पैदाइश की। इस तरह धीरे
धीरे यूनिवर्स का फैलाव हुआ। यानि यूनिवर्स का
क्रियेशन ठीक उसी तरह हुआ
जैसे किसी जानदार दरख्त या इंसान या
किसी जानवर की
पैदाइश होती है। किसी
भी जानदार का पहले एक सेल (Cell ) बनता
है फिर वह डिवाइड होकर अपने जैसे और सेल पैदा
करता है और इस तरह धीरे
धीरे पूरा जिस्म तैयार हो जाता है।
इसी तरह पूरी कायनात
की भी खिलकत हुई है।
कहीं कोई धमाका नहीं हुआ।
इमाम जाफर सादिक़ (अ-) की थ्योरी
में एक और खास बात है। जिसके मुताबिक यूनिवर्स एक
टाइम पीरियड में फैलता है और दूसरे में
सिकुड़ता है। इस तरह बिग बैग वह प्वाइंट हुआ जब
यूनिवर्स पूरी तरह सिकुड़ चुका था। उससे
पहले कायनात की कोई दूसरी
ही शक्ल मौजूद थी। जिसके बारे
में सिर्फ अल्लाह को ही इल्म है। इस
तरह खिलकत व खात्मे का यह सिलसिला हमेशा चलता
रहता है। ऐसी हालत में कायनात
की शुरुआत कब हुई यह मालूम करना
नामुमकिन है।
कायनात की शुरुआत व खात्मे के इस सिलसिले
की बात कुरआन इन अल्फाज में कह रहा
है :
(21-104) वह दिन जब कि हम आसमान को यूं लपेट
कर रख देंगे जैसे किताब के पन्ने लपेट दिये जाते हैं। जिस
तरह हमने पहले खिलकत
की शुरुआत की थी
उसी तरह हम फिर उसे दोहरायेंगे। ये एक
वादा है हमारे जिम्मे और ये काम हमें बहरहाल करना
है।
(86-11) क़सम है हटते बढ़ते चलने
(Reciprocating) वाले आसमान की।
Allah Knows better!
क्या आत्मा अनादी है?
देखो आत्मा दिखती नही नही कोई उसे महसुस कर सकता ..आत्मा एक प्रोसेस कोड सॉफ्टवेअर की तरह है! जैसे न दिखने वाला वास्तविक वजुद न रखने वाला सॉफ्टवेअर पुरे सिसटेम मशीन आदी को ओपरेट करता है! आत्मा शरीर को ओपरेट करती है ! यानी लाशऊरी तहरिक के तरह है! जैसे सॉफ्टवेअर को खत्म किया जा सकता है वैसे ही आत्मा को भी!
जरा गौर करो मुसलमानो ये आर्य समाजी तूमसे कहते है कि आत्मा अनादी है और परमात्मा यानी जो सबका आत्मा है यानी खुदा भी अनादी है! तो जीवो यानी मखलुक की आत्मा मै तो कोई शक्ति नही अलबत्ता परमात्मा मे शक्ति कहाँ से आयी अगर यह मुमकीन है कि साथ मौजुद अरबो अत्माओ को न ईल्म आया न ताकत सिर्फ एक मे ही क्यो तो यह भी मुमकीन है कि वह एक अपनी शक्ति से बना दे!
अनादी है तो जिसका स्वभाव ही निर्माण का है तो उसका अनादी होना संभव नही अच्छा जब अनादी है आत्मा तो परमात्मा की बात कौई क्यू माने अच्छा वेदो की हालत ही देखो ये कभी हिदायत के लिये कभी फैल नही पाये यही परमात्मा की कमजोरी दिखाई देती है! ये इल्जाम वेदों पर लगना ही है! जबकी जिन ईसाई व ईस्लाम की ये बुराई करते है ! तो परमात्मा ने इन धर्मो को फैलने से रोका नही नही वेदों की हीदायत है! लोगो तक पहुँची नही..
ये है वेदो की हकीकत ये कुरान मे शक पैदा करते है! जबकी इनके अकीदे मे बहुत कमी मौजुद है..
Thursday, 16 July 2015
क़ुरान सूरेह यूनुस की आयत 3 पर ऐतराज का जवाब,कुर्शी अर्श
पहले सही तरजुमा देखे"इन्ना (बेशक) रब्बूकूम(तुम्हारा रब या पालनहार) अल्लाहु(यकता बरहक माबुद)है!अल्लाजी़ (वह जिसने) खलक(पैदा किया)अस्समावाति(औसमानो)वल अर्दी(और जमीन को) फी(में)सित्तती(छ:)अय्यामीन( वैसे सामान्यतया अरेबी मे दिन के लिये यवमीन आता है पर यहाँ दिन से मुराद विशेष समय है)इस्तवाअल्ललअर्शि( यहा शब्द इस्तवा आया है यानी काइम होना..
पर तमाम जबानो का कायदा है! की जब कोई शब्द विशेष हस्ती के लिये स्थिति वगैरह के लिये प्रयोग हो तो उसका उसी अनुसार बदलता है ..
तो यहाँ काइम होना आम लोगो की तरह नही) अर्श या कुर्सि के दो मतलब अरेबी मे लिये जाते है
१- खास अर्थ संपत्ति या हुकुमत
२- तख्त...) अब इसकी कल्पना नही की जा सकती है!
ऐसे कुछ मंत्र वेदो मे भी है! जैसे यजुर्वेद अध्याय३१/१सहत्रशिर्षा पुरुष: सहस्त्राक्ष सहस्त्रपात् यानी एक विराट पुरुष जिसके हजारो हाथ पैर आँखे है..यहाँ वेदिक खुदा के लिये ये शब्द प्रयोग हुये है! लेकिन वेदिक विद्वान इसका अर्थ लेते है खुदा सारी कायनात मै फैला है! वैसे दुसरी जगह कुरान मे आठ फरिश्तो के तख्त को उठा के लाने का जिक्र है यहाँ इस आयत मे अर्श न्याय और खुदा की सुल्तानीयत का प्रतिक है..)
अब ऐसा क्युँ तो जरा आयत के अगले शब्द पर गौर करे..युद्दबिरु (तदबीर करता है)अमवारी (काम की) यानी कायनात के निजाम या बंदोबस्त की इसे और गहराई से समझने के लिये देखे सुरह फुसीलत आयत ८-१३ तक..
मा (नही) मिन( कोई सिफारशी ) इल्लामिमबाअदीही(मगर बाद )इज्निही(इसकी इजाजत के)जा़लिक(वहहै)अल्लाहु(एकमात्र बरहक उपास्य)रब्बुकुम (तुम्हारा रब)पस उसकी बंदगी करो..."
अब इसी सुरह यूनूस आयत ३ का तर्जुमा जो आर्य समाजी पेश करते है वो ये है"अल्लाह तुम्हारा पालनहार है, जिसने पैदा किया आस्मानो को और जमीन को ६ दिनो मे फिर आस्मान पर जाकर अपने सिहासन पर विराजमान हुआ"
अब ये कहना ये चाहते है कि सिहासन तो केवल शरीर धारी का होता है..
तो जनाब ये अकीदा आपका कि परमात्मा निराकार है! तो बताओ किस रुप मे निराकार है!
१- आत्मा रुह है तो जनाब दयानंनद ने सत्यार्थ प्रकाश समुलास आठ मे आत्मा को अनादी बताया तो जब सब जीवआत्मा परमात्मा (खुदा) के साथ ही मौजुद थी तो दोनो के मकाम मे अंतर क्या रहा बाकी उसे परमात्मा क्यों माने ..चलो कहोगे कि उसने लोगो को बनाया..तो सवाल खडा होगा कैसे बनाया?
कहोगे की अपनी शक्ति से तो कुल मिलाकर वह अपनी शक्ति से परमात्मा (खुदा) है! तो फिर उसे निराकार होने की जरुरत क्यो फैला होने यानी व्यापक या होने की जैसे नमक मे पानी मिला होना तो लोगो मे अपवित्रता क्यो जब परमात्मा उनमे है!
तो क्या कायनात चलाने को वह फैला है! तो परमात्मा भी निर्भर हो गया चुँकि परमात्मा के हाथ पैर तो है नही तो कैसे बनाता है ! तो साफ है परमात्मा को व्यापक होने की निराकार होने की जरुरत नही..तब यह सवाल ही नीर्थक हो गया...
Tuesday, 14 July 2015
इस्लामिक तरीके से मोबाइल केसे इस्तमाल करे .?
═SUWAL 1:: Mai ye pochna chahta hu Qurane
kareem ko Mobail me rakhna Kaisa hai (Mobile kahan kahan jata hai toilet me jata hai) to mobile main Qurane Kareem ki aayat rakh sakte hai ya nahi ??? 🔵JAWAB 1:: Insan k seene mein quran hai kalima hai aur wo toilet bhi jata hai to fir jana band karen Albatta screen pe quran khol kar fir galat jagah pe le jana ye bura hai Is liye apne deen ko mushkil na banayen Mobile mein quran rakhna jaiz hai ┄─━═════▤▤═════━─┄ 🔴SUWAL 2:: Agar hum mobile main Qur'an ki aayat parh rahe hain tab bhi wazu karna zarori hai ??? 🔵JAWAB 2:: Agar mobile me quran ya quran ki koi aayat screen pe open nahi he Balke file band he to mobile bila wuzu pakad sakte hen screen chhu sakte hen matlab us waqt quran ke hukm me nahi... Albatta jab screen pe aayat open ho to us ko bila wuzu nahi chhu sakte. ┄─━═════▤▤═════━─┄ 🔴SUWAL 3:: MOBILE YA COMPUTER SE QURAN KI AAYAAT SEND AUR DELETE KARNA KAISA HAI ??? 🔵JAWAB 3:: MOBILE YA COMPUTER SE QURAN KI AAYAAT SEND AUR DELETE KIA JA SAKTA HAI. LAKIN DUNYAWI SONGS , MOVIES YA ACTORS/ACTRESS KI PIC KO LOAD KARNE KE LIE QURAN KI AAYAAT YA DEENI POST DELETE KARNA BILKUL MUNASIB NAHI. DOOSRI QURANI AAYAAT YA DOOSRE DEENI POST KO LOAD KARNE KE LIE AGAR PURANE WALE KO DELETE KIA JAE TO KOI HARJ NAHI. AAJ BHI MADARSO MAIN AUR DOOSRI JAGHA JAB PARHAYA JATA HAI TO BLACK BOARD YA WHITE BOARD PAR QURAN KI AAYAAT AUR HADEESO KO LIKHA JATA HAI AUR PHIR OSE MITA KAR DOOSRI AAYAAT AUR HADEES LIKHI JAATI H AI. ┄─━═════▤▤═════━─┄ 🔴PLEASE SHARE ┄─━═════▤▤═════━─┄